शुक्रवार, 11 मार्च 2016

शुगर का सबसे बढ़िया आयुर्वेदिक इलाज

भारत में 5 करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोगों को डाइबटीज है और 3 करोड़ से ज्यादा को हो जाएगी अगले कुछ सालों में (सरकार ऐसा कह रही है ) , हर 2 मिनट में एक आदमी डाइबटीज से मर जाता हैं !
और complications बहुत है !
किसी की किडनी खराब हो रही है ,किसी का लीवर खराब हो रहा है , किसी को paralisis हो रहा है किसी को brain stroke हो रहा है ,किसी को heart attack आ रहा है ! कुल मिलकर complications
बहुत है diabetes के !!
मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज (blood sugar level ) स्तर बढा़ हूँआ मिलता है, यह रोग मरीजों के (रक्त मे गंदा कोलेस्ट्रॉल,) के अवयव के बढने के कारण होता है। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।
भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज हमारे रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। pancreas (अग्न्याशय) ग्लूकोज उत्पन्न करता है इनसुलिन भी रक्तधारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है।
मधुमेह बीमारी का असली कारण जब तक आप लोग नही समझेगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नही हो सकती है जब आपके रक्त में वसा (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL की मात्रा बढ जाती है तब रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों तरफ चिपक जाता है !और खून में मोजूद जो इन्सुलिन है कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है (इंसुलिन की मात्रा तो पर्याप्त होती है किन्तु इससे द्वारो को खोला नहीं जा सकता है, अर्थात पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है)
वो इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नही आता है जिस कारण जब हम शुगर level चैक करते हैं शरीर में हमेशा शुगर का स्तर हमेशा ही बढा हुआ होता है क्यूंकि वो कोशिकाओ तक नहीं पहुंची क्योंकि वहाँ (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL VLDL जमा हुआ है जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते है तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है !
अब आप समझ गये होगे कि मधुमेह का रिश्ता कोलेस्ट्रोल से है न कि शुगर से
जब सम्भोग के समय पति पत्नी आपस में नही बना कर रख पाते है या सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है समझ जाइये मधुमेह हो चूका है या होने वाला है क्योकि जिस आदमी को मधुमेह होने वाला हो उसे सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है क्योकि मधुमेह से पहले जो बिमारी आती वो है सेक्स में प्रोब्लम होना, मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। बार बार बहुत अधिक प्यास लगती है अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्मध्घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।
तो ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ??
राजीव भाई की एक छोटी सी सलाह है कि आप insulin पर ज्यादा निर्भर ना रहें ! क्यूंकि ये insulin डाईब्टीज से भी ज्यादा खराब है side effect इसके बहुत हैं !! तो आप ये आयुर्वेद की दवा का फार्मूला लिखिये !
और जरूर इस्तेमाल करें !!
100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
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तो
मेथी का दना – 100 ग्राम
तेज पत्ता ——- 100 ग्राम
जामुन की गुठली -150 ग्राम
बेलपत्र के पत्ते – 250 ग्राम
तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है !!
इसे सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें !!
2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये )


कई बार लोगो से सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें ??
आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये !!
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अगर आप इसके साथ एक और काम करे तो सोने पे सुहागा हो जाएगा ! और ये दवा का असर बहुत ही जल्दी होगा !! जैसा कि आप जानते है शरीर की सभी बीमारियाँ वात,पित ,और कफ के बिगड़ने से होती हैं !! दुनिया मे सिर्फ दो ही ओषधियाँ है जो इन तीनों के सतर को बराबर रखती है !!
एक है गौ मूत्र , दूसरी है त्रिफला चूर्ण !!
अब आप ठहरे अँग्रेजी मानसिकता के लोग ! गौ मूत्र का नाम सुनते ही आपकी नाक चढ़ गई होगी !!
और हमारी मजबूरी ये है कि आपको गौ मूत्र का महत्व बताना हो तो हमको अमेरिका का उदाहरण देना पड़ेगा !
क्यूंकि अंग्रेज़ मेकोले के बनाए indian education system मे पढ़ कर आपकी बुद्धि ऐसी हो गई है कि
आपको सिर्फ अमेरिका(अंग्रेज़ो ) द्वारा किये गए काम मे ही विश्वास होता है ! आपको कहीं ना कहीं लगता ये अमरीकी बहुत समझदार जो करते है सोच समझ के करते हैं !!
तो खैर आपकी जानकरी के लिए बता दूँ कि अमेरिका ने गौ मूत्र पर 6 पेटेंट ले लिए हैं !! उसको इसका महत्व समझ आने लगा है !! और हमारे शास्त्रो मे करोड़ो वर्षो पहले से इसका महत्व बताया है ! लेकिन गौ मूत्र का नाम सुनते हमारी नाक चढ़ती है !
खैर जिसको पीना है वो पी सकता है ! गौ मूत्र बिलकुल ताजा पिये सबसे बढ़िया !! बाहरी प्रयोग के लिए जितना पुराना उतना अच्छा है लेकिन पीने के लिए ताजा सबसे बढ़िया !! हमेशा देशी गाय का ही मूत्र पिये (देशी गाय की निशानी जिसकी पीठ पर हम्प होता है ) ! 3 -4 घंटे से अधिक पुराना मूत्र ना पिये !!
और याद रखे गौ मूत्र पीना है अर्क नहीं ! आधे से एक सुबह सुबह कप पिये ! सारी बीमारियाँ दूर !
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अब बात करते हैं त्रिफला चूर्ण की !
त्रिफला अर्थात तीन फल !
कौन से तीन फल !
1) हरड़ (Terminalia chebula)
2) बहेडा (Terminalia bellirica)
3) आंवला (Emblica officinalis)
एक बात याद रखें इनकी मात्रा हमेशा 1:2:3 होनी चाहिए ! 1 अनुपात 2 अनुपात 3 !
बाजार मे जितने भी त्रिफला चूर्ण मिलते है सब मे तीनों की मात्रा बराबर होती है ! बहुत ही कम बीमारियाँ होती है जिसमे त्रिफला बराबर मात्रा मे लेना चाहिए !!
इसलिए आप जब त्रिफला चूर्ण बनवाए तो 1 :2 :3 मे ही बनवाए !!
सबसे पहले हरड़ 100 ग्राम , फिर बहेड़ा 200 ग्राम और अंत आंवला 300 ग्राम !!
इन तीनों को भी एक दूसरे मे मिलकर पाउडर बना लीजिये !! और रात को एक से डेड चमच गर्म पानी के साथ प्रयोग करें !!
सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें ??
आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये !!
सावधानियाँ !!
चीनी का प्रयोग कभी ना करें और जो sugar free गोलियां का तो सोचे भी नहीं !!
गुड़ खाये , फल खाये ! भगवान की बनाई गई को भी मीठी चीजे खा सकते हैं !!
रात का खाना सर्यास्त के पूर्व करना होगा !! मतलब सूर्य अस्त के बाद भोजन ना करें
ऐसी चीजे ज्यादा खाए जिसमे फाइबर हो रेशे ज्यादा हो, High Fiber Low Fat Diet घी तेल वाली डायेट कम हो और फाइबर वाली ज्यादा हो रेशेदार चीजे ज्यादा खाए। सब्जिया में बहुत रेशे है वो खाए, डाल जो छिलके वाली हो वो खाए, मोटा अनाज ज्यादा खाए, फल ऐसी खाए जिनमे रेशा बहुत है ।
आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !!
शुगर के बारे मे अधिक जानकारी के लिए यहाँ click करें !
और जो चीनी खाते है वो तो जरूर click कर देखें !!https://www.youtube.com/watch?v=qAF4sj0uiUs

पथरी का आयुर्वेदिक और होमेओपेथी इलाज

सबसे पहले कुछ परहेज !
मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं )
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|
आयुर्वेदिक इलाज !
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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके 10 पत्तों को 1 से डेड गिलास पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!! आप दिन मे 3 बार पत्ते 3 पत्ते सीधे भी खा सकते हैं !
होमियोपेथी इलाज !
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अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये| (स्वदेशी कंपनी SBL की बढ़िया असर करती है )
(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )
अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |


इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|
99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महीने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |
और यही दवा से पित की पथरी (gallbladder stones ) भी ठीक हो जाती है ! जिसे आधुनिक डाक्टर पित का कैंसर बोल देते हैं !
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ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???
इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|
और एक बात इस BERBERIS VULGARIS से पीलिया jaundice भी ठीक होता है !
आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !!

किसी कारण पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click कर देखे !www.youtube.com/watch?v=pWfljrsaBGM

बुधवार, 9 मार्च 2016

जीवन मे इन आयुर्वेद के नियमो जरूर पालण करें और निरोगी रहें ।

मित्रो आप इन नियमो का पालण पूरी ईमानदारी से अपनी ज़िंदगी मे करे !!
ये नियमो का पालण न करने से ही बीमारियाँ ज़िंदगी मे आती हैं !!
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सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गर्म पानी पिये !! 2 से 3 गिलास जरूर पिये !
पानी हमेशा बैठ कर पिये !
पानी हमेशा घूट घूट करके पिये !!
घूट घूट कर इसलिए पीना है ! ताकि सुबह की जो मुंह की लार है इसमे ओषधिए गुण बहुत है ! ये लार पेट मे जानी चाहिए ! वो तभी संभव है जब आप पानी बिलकुल घूट घूट कर मुंह मे घूमा कर पिएंगे !
इसके बाद दूसरा काम पेट साफ करने का है ! रोज पानी पीकर सुबह शोचालय जरूर जाये !पेट का सही ढंग से साफ न होना 108 बीमारियो की जड़ है !
खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है !
हमेशा डेड घंटे बाद ही पानी पीएं !
खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे तीन चीजे आती हैं !!
1) जूस
2) छाज (लस्सी) या दहीं !
3) दूध
सुबह खाने के बाद अगर कुछ पीना है तो हमेशा जूस पिये !
दोपहर को दहीं खाये ! या लस्सी पिये !
और दूध हमेशा रात को पिये !!
इन तीनों के क्रम को कभी उल्टा पुलटा न करे !!फल सुबह ही खाएं (ज्यादा से ज्यादा दोपहर 1 बजे तक ) ! दहीं दोपहर को दूध रात को !
इसके इलावा खाने के तेल मे भूल कर भी refine oil का प्रयोग मत करे !(वो चाहे किसी भी कंपनी का क्यू न हो dalda ,ruchi,gagan)को भी हो सकता है !
अभी के अभी घर से निकाल दें ! बहुत ही घातक है !
सरसों के तेल का प्रयोग करे ! या देशी गाय के दूध का शुद्ध घी खाएं ! ! (पतंजलि का सरसों का तेल एक दम शुद्ध है !(शुद्ध सरसों के तेल की पहचान है मुंह पर लगाते ही एक दम जलेगा ! और खाना बनाते समय आंखो मे हल्की जलन होगी !
चीनी का प्रयोग तुरंत बंद कर दीजिये ! गुड खाना का प्रयोग करे ! या शक्कर खाये ! चीनी बहुत बीमारियो की जड़ ! slow poison है !)


खाने बनाने मे हमेशा सेंधा नमक या काला नमक का ही प्रयोग करे !! आयोडिन युक्त नमक कभी न खाएं !!
(ये नमक वाली बात आपको अजीब लग सकती हैं ! लेकिन बहुत रहस्यमय कहानी है इस आओडीन युकत नमक के पीछे ) बाद मे विस्तार से बताई जाएगी !!
सुबह का भोजन सूर्य उद्य ! होने के 2 से 3 घंटे तक कर लीजिये ! (अगर 7 बजे आपके शहर मे सूर्य निकलता है ! तो 9 या 10 बजे तक सुबह का भोजन कर लीजिये ! इस दौरान जठर अग्नि सबसे तेज होती है ! सुबह का खाना हमेशा भर पेट खाएं ! सुबह के खाने मे पेट से ज्यादा मन संतुष्टि होना जरूरी है ! इसलिए अपनी मनपसंद वस्तु सुबह खाएं !!
खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे ! लेकिन इससे ज्यादा नहीं !
इसी प्रकार दोपहर को खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे ! लेकिन इससे ज्यादा नहीं !
रात को खाना खाने के तुरंत बाद नहीं सोना ! रात को खाना खाने के बाद बाहर सैर करने जाएँ ! कम से कम 500 कदम सैर करे ! और रात को खाना खाने के कम स कम 2 घंटे बाद ही सोएँ !
ब्रह्मचारी है (विवाह के बंधन मे नहीं बंधे ) तो हमेशा सिर पूर्व दिशा की और करके सोएँ ! ब्रह्मचारी नहीं है तो हमेशा सिर दक्षिण की तरफ करके सोएँ ! उत्तर और पश्चिम की तरफ कभी सिर मत करके सोएँ !
मैदे से बनी चीजे पीज़ा ,बर्गर ,hotdog,पूलड़ोग , आदि न खाएं ! ये सब मेदे को सड़ा कर बनती है !! कब्ज का बहुत बड़ा कारण है ! और ऊपर आपने पढ़ा कब्ज से 108 रोग आते हैं )
इन सब नियमो का अगर पूरी ईमानदारी से प्रयोग करेंगे ! 1 से 2 महीने मे ऐसा लगेगा पूरी जिंदगी बदल गई है ! मोटापा है तो कम हो जाएगा ! hihgh BP,cholesterol,triglycerides,सब level पर आना शुरू हो जाएगा ! HDL बढ्ने लगेगा ! LDL ,VLDL कम होने लगेगा !! और भी बहुत से बदलाव आप देखेंगे !!
ऊपर लिखी सारी बातों को एक एक कर विस्तार से समझने के लिए यहाँ click करें !https://www.youtube.com/watch?v=-abSZjwsoJw

सोमवार, 7 मार्च 2016

Beautiful Story of feelings

Once there was an island where all the feelings lived together. One day there came a storm in the sea and the island was about to drown .Every feeling was scared but Love made a boat to escape. All the feelings jumped in the boat except for one feeling. Love got down to see who it was…it was Ego! Love tried & tried but Ego didn’t move. Everyone asked Love to leave Ego & come in the boat but Love was meant to Love. It remained with Ego. All other feelings were left alive but Love died because of Ego!
Think over it. You’ll love it every time u read it.

Very touching story with a deep rooted moral.

A very loving couple have been married for over 10 years without any child and
it was becoming their 11th year. Steve and Sarah stayed with each other and greatly hoped that they will have a child before their 11th year of marriage runs out because they were under persuasion from friends and family members to get a divorce .
but they couldn’t let go because of the strong bond of love between them.
Months passed and one day, while Dave was returning from work, he saw his wife walking down the road with a man.
The man had his arms around her neck and they looked very happy.
For over a week, he saw the same man with his wife at various places and one evening, while Dave was returning from work he saw the man drop her off at the house after giving her a kiss on the cheek. Dave was angry and sad.
Two days later, after a hectic day at work, Dave was taking water with a glass jug from the dispenser when the phone rang.
He picked it up and the person said,”Hello dear, I’ll be coming to your house this evening to see you as promised. I hope…..”.
Dave hung-up the phone. It was a male voice and he was sure the person was the man he had always seen her with. He suddenly became shaky with the thought that he has lost his
wife to another man. The glass jug fell from his hand and shattered into pieces.
His wife came running into the room asking,”Is everything okay?”. In anger he gave his wife a push and she fell. She wasn’t moving or getting up.
Dave then realized that she fell where he broke the glass jug.
A large piece of glass had pierced her. He felt her breath, pulse and heartbeat but there she lay lifeless. His wife was dead! In total confusion, he saw an envelope in her hand.
He took it, opened it and was shocked by its content -it was a letter. It reads:
“My loving husband, words cannot express how I feel so,
I had to write it down. I have been going to see a doctor for over a
week and I wanted to be sure before I give you the news.
The doctor confirmed it that I am pregnant with a twin and our baby is due 2 months from now. The same doctor is my long lost brother whom I lost contact with after our marriage. He has promised to take care of me and our baby and give us the best
without collecting a dime.
He also promised to have dinner with us today.
I am putting this on your favorite chair in the sitting room for you
to remember the day you proposed to me and I had to write to you saying,
“Yes” because I was so happy. Thanks for staying by my side”. -Your loving wife .
The letter fell from his hand. There was a knock at the door and the same man he had seen with his wife came in and said, ”Hello Dave, I suppose I’m right. Its Max the brother of your wife and……”. Suddenly, Max noticed his sister lying in a pool of her blood.
He rushed her to the hospital and she was confirmed dead. Her twin baby gone.
Message OF THE STORY
- We should not be too quick to take unnecessary actions in our relationship or marriage when we havn’t questioned our partner or spouse on what we saw or heard about them.
- Each of us have our faults. We shouldn’t be too fast to decide the judgement of others.
Have you thought of that thing you are doing wrong that no one sees?
- Not everything you see, hear or believe about someone is true.
moral OF THE STORY
Always learn to control yourself under any condition or situation, irrespective of what you’ve heard or seen You never can tell… Can you?
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Quotes About Success

“He has achieved success who has lived well, laughed often, and loved much;
Who has enjoyed the trust of pure women, the respect of intelligent men and the love of little children;
Who has filled his niche and accomplished his task;
Who has never lacked appreciation of Earth’s beauty or failed to express it;
Who has left the world better than he found it,
Whether an improved poppy, a perfect poem, or a rescued soul;
Who has always looked for the best in others and given them the best he had;
Whose life was an inspiration;
Whose memory a benediction.”

BUILDING BRIDGES



Once upon a time two brothers who lived on adjoining farms fell into conflict. It was the first serious rift in 40 years of farming side by side, sharing machinery, and trading labor and goods as needed without a hitch.

Then the long collaboration fell apart. It began with a small misunderstanding and it grew into a major difference, and finally it exploded into an exchange of bitter words followed by weeks of silence.

One morning there was a knock on John's door. He opened it to find a man with a carpenter's toolbox. "I'm looking for a few days work," he said.

"Perhaps you would have a few small jobs here and there. Could I help you?"

"Yes," said the older brother. "I do have a job for you. Look across the creek at that farm. That's my neighbor, in fact, it's my younger brother. Last week there was a meadow between us and he took his bulldozer to the river levee and now there is a creek between us. Well, he may have done this to spite me, but I'll go him one better. See that pile of lumber curing by the barn? I want you to build me a fence - an 8-foot fence - so I won't need to see his place anymore. Cool him down, anyhow."

The carpenter said, "I think I understand the situation. Show me the nails and the post-hole digger and I'll be able to do a job that pleases you."

The older brother had to go to town for supplies, so he helped the carpenter get the materials ready and then he was off for the day.

The carpenter worked hard all that day measuring, sawing, nailing.

About sunset when the farmer returned, the carpenter had just finished his job. The farmer's eyes opened wide, his jaw dropped.

There was no fence there at all. It was a bridge... a bridge stretching from one side of the creek to the other! A fine piece of work handrails and all - and the neighbor, his younger brother, was coming across, his hand outstretched.

"You are quite a fellow to build this bridge after all I've said and done."

The two brothers stood at each end of the bridge, and then they met in the middle, taking each other's hand. They turned to see the carpenter hoist his toolbox on his shoulder. "No, wait! Stay a few days. I've a lot of other projects for you," said the older brother.

"I'd love to stay on," the carpenter said, "but, I have many more bridges to build

IF WHAT ????????????????

What if, GOD couldn't take the time to bless us today because
we couldn't take the time to thank Him yesterday?

What if, GOD decided to stop leading us tomorrow because
we didn't follow Him today?

What if, we never saw another flower bloom because 
we grumbled when GOD sent the rain.

What if, GOD didn't walk with us today because
we failed to recognize it as His day?

What if, GOD took away the Bible tomorrow because
we would not read it today?

What if, GOD took away His message because
we failed to listen to the messenger?

What if, GOD didn't send His only begotten Son because
He wanted us to be prepared to pay the price for sin.

What if, the door of the church was closed because
we did not open the door of our heart?

What if, GOD stopped loving and caring for us because
we failed to love and care for others?

What if, GOD would not hear us today because
we would not listen to Him yesterday?

What if, GOD answered our prayers 
the way we answer His call to service?

What if, GOD met our needs 
the way we give Him our lives???

हमारे साथ वैसा ही होता है जैसा हम मानते है और विश्वास करते है|”

इसी तरह क्रिकेट की बात ले लीजिये – वनडे क्रिकेट के इतने बड़े इतिहास में वर्ष 2010 तक एक भी दोहरा शतक नहीं लगा लेकिन वर्ष 2010 में सचिन तेंदुलकर के दोहरा शतक लगाने के 2-4 वर्षों में ही 4-5 और दोहरे शतक (Double Centuries) लग गए| क्या यह मात्र संयोग था? ऐसा क्यों हुआ?



ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि 2010 से पहले जब किसी ने दोहरा शतक नहीं लगाया था तो सभी की मानसिकता यही थी कि दोहरा शतक लगाना बहुत ही मुश्किल है| क्योंकि अभी तक इस रिकॉर्ड को किसी ने नहीं तोडा था तो यह नामुनकिन सा लगता था| लेकिन जब सचिन ने दोहरा शतक लगाया तो सभी की मानसिकता बदल गयी और यह लगने लगा कि दोहरा शतक लगाना मुश्किल है पर नामुनकिन नहीं|





इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं (Nothing is impossible in this world),“नामुनकिन” हमारा भ्रम या गलत मान्यता है जो आख़िरकार गलत साबित होती है|

Life Changing Hindi Stories

“हम वो सब कर सकते है जो हम सोच सकते है और हम वो सब सोच सकते है जो आज तक हमने नहीं सोचा”



हम गलत धारणाएँ (Wrong Beliefs) बना लेते है और हमें इसी कारण कोई कार्य मुश्किल या असंभव लगता है|

हम आज जो भी है वह हमारी सोच का ही परिणाम है| हम जैसा सोचते है, वैसा बन जाते है – (We become, what we think)| “असंभव” या “नामुनकिन” (Impossible) हमारी सोच का ही परिणाम है|



“हमारे साथ वैसा ही होता है जैसा हम मानते है और विश्वास करते है|”



भौरा विज्ञान के नियमों के अनुसार उड़ नहीं सकता लेकिन वह मानता है कि वह उड़ सकता है इसलिए वह उड़ जाता है जबकि हाथी कमजोर रस्सी को आसानी से तोड़ सकता है लेकिन वह यह मानता है कि वह उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता, इसलिए वह रस्सी को तोड़ नहीं पाता| |



यह हम पर निर्भर करता है कि हमें हाथी की तरह अपनी ही सोच का गुलाम रहना है या भौरे की तरह स्वतंत्र| अगर हम मानते है और स्वंय पर यह विश्वास करते है कि हम कुछ भी कर सकते है तो हमारे लिए नामुनकिन कुछ भी नही———————————————————- Nothing Is Impossible.

खुश रहने का राज़ क्या है



एक समय की बात है, एक गाँव में महान ऋषि रहते थे| लोग उनके पास अपनी कठिनाईयां लेकर आते थे और ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे| एक दिन एक व्यक्ति, ऋषि के पास आया और ऋषि से एक प्रश्न पूछा| उसने ऋषि से पूछा कि “गुरुदेव मैं यह जानना चाहता हुईं कि हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है (What is the Secret of Happiness)?” ऋषि ने उससे कहा कि तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे खुश रहने का राज़ (Secret of Happiness) बताता हूँ|

ऐसा कहकर ऋषि और वह व्यक्ति जंगल की तरफ चलने लगे| रास्ते में ऋषि ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस व्यक्ति को कह दिया कि इसे पकड़ो और चलो| उस व्यक्ति ने पत्थर को उठाया और वह ऋषि के साथ साथ जंगल की तरफ चलने लगा|

कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा| लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया और उस व्यक्ति से दर्द सहा नहीं गया तो उसने ऋषि से कहा कि उसे दर्द हो रहा है| तो ऋषि ने कहा कि इस पत्थर को नीचे रख दो| पत्थर को नीचे रखने पर उस व्यक्ति को बड़ी राहत महसूस हुयी|

तभी ऋषि ने कहा – “यही है खुश रहने का राज़ (Secret of Happiness)”| व्यक्ति ने कहा – गुरुवर मैं समझा नहीं|

तो ऋषि ने कहा-




जिस तरह इस पत्थर को एक मिनट तक हाथ में रखने पर थोडा सा दर्द होता है और अगर इसे एक घंटे तक हाथ में रखें तो थोडा ज्यादा दर्द होता है और अगर इसे और ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे तो दर्द बढ़ता जायेगा उसी तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दु:खी और निराश रहेंगे| यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को एक मिनट तक उठाये रखते है या उसे जिंदगी भर| अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो दु:ख रुपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीख लो और हो सके तो उसे उठाओ ही नहीं


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मैं खुद को Positive ? कैसे रखता हूँ

 कैसे रखता हूँ मैं खुद को Positive ?

दोस्तों आज मैं आपके साथ एक बड़ी ही interesting और important बात share कर रहा हूँ. एक ऐसी छोटी सी  बात जिसने मेरे thought process को improve करने और positive बनाने में बहुत मदद की है.



मुझे पूरी उम्मीद है कि ये आपके लिए भी उतना ही लाभदायक होगा.  ऐसा मैं इसलिए भी कह पा रहा हूँ कि क्योंकि इसे समझना  बहुत ही simple है. और इसे practically apply करना भी आसान है.

बात जनवरी 2010 की है मैं तब गोरखपुर में था. चूँकि मुझे नयी-नयी books पढने का शौक है , मैं एक दूकान में ऐसी ही कोई book खोज रहा था, तभी David J. Schwartz की लिखी हुई किताब ,” The Magic of Thinking Big”  मुझे नज़र आई.  दो -चार पन्ने पलटने के बाद मैं समझ गया कि इसमें दम है और मैंने वो book खरीद ली.



वैसे तो इसमें मैंने कई लाभप्रद बातें पढ़ीं पर एक बात मेरे दिमाग में  घर कर गयी और आज मैं उसी के बारे में बता रहा हूँ.
हमारा दिमाग विचारों  का निर्माण  करने वाली  एक फैक्ट्री  है . इसमें हर  वक़्त  कोई ना  कोई thought  बनती  रहती  है. और इस  काम  को कराने  के लिए  हमारे  पास   दो  बड़े  ही आज्ञाकारी  सेवक  हैं और साथ ही ये अपने काम  में  माहिर  भी हैं . आप  कभी  भी इनकी  परीक्षा  ले  लीजिये  ये उसमे  सफल  ही होंगे . आइये  इनका  परिचय  कराता  हूँ-

पहले  सेवक  का  नाम  है-  Mr. Triumph  या  मिस्टर विजय



दुसरे  सेवक  का  नाम  है- Mr. Defeat या  मिस्टर  पराजय

Mr . विजय  का काम  है आपके आदेशानुसार  positive thoughts का निर्माण करना. और Mr. पराजय  का काम  है आपके आदेशानुसार  negative thoughts का निर्माण करना. और ये सेवक इतने निपुण हैं कि ये आपके इशारे के तुरंत समझ जाते हैं और बिना वक़्त गवाएं अपना काम शुरू कर देते हैं.

Mr. विजय इस बात को बताने में  में specialize करते हैं कि आप चीजों को क्यों कर सकते हैं?, आप क्यों सफल हो सकते हैं?

Mr. पराजय इस बात को बताने में specialize करते हैं कि आप चीजों  को क्यों नहीं कर सकते हैं?,आप  क्यों असफल हो सकते हैं?

जब  आप   सोचते  हैं  कि मेरी life क्यों अच्छी है तो तुरंत  Mr. विजय  इस  बात को सही  साबित  करने के लिए आपके दिमाग   में  positive thouhts produce करने लगते  है, जो आपके अब तक के जीवन के अनुभवों से निकल कर आती है . जैसे  कि-

मेरे पास  इतना  अच्छा  परिवार  है.
मुझे चाहने  वाले  कितने  सारे  अच्छे  लोग  हैं .
मैं well settled हूँ, financially इतना  सक्षम  हूँ कि खुश  रह  सकूँ .
मैं जो करना चाहता  हूँ वो कर पा रहा हूँ.
 etc.
इसके  विपरीत  जब  आप सोचते  हैं  कि मेरी life क्यों अच्छी नहीं  है  ,तो तुरंत  Mr. पराजय   इस  बात को सही  साबित   करने के लिए आपके दिमाग में  negative thoughts produce करने लगते  है. जैसे  कि-

 मैं अपनी  life में अभी  तक  कुछ  खास  नहीं  achieve कर पाया
मेरी नौकरी  मेरी काबलियत  के मुताबिक़  नहीं  है
मेरे साथ हमेशा  बुरा  ही होता  है.
etc.
ये दोनों  सेवक  जी जान   से  आपकी  बात का समर्थन  करते  हैं . अब  ये आपके ऊपर  depend करता  है कि आप  इसमें से  किसकी services  लेना  चाहते  हैं . इतना याद रखिये कि इनमे से आप जिसको ज्यादा काम देंगे वो उतना ही मजबूत होता जायेगा और एक दिन वो इस फैक्ट्री पर अपना कब्ज़ा कर लेगा, और धीरे-धीरे दुसरे सेवक को बिलकुल निकम्मा कर देगा.अब आप को decide करना है कि आप किसका कब्ज़ा चाहते हैं- मिस्टर विजय का या मिस्टर पराजय का?

यदि  life को improve करना है तो जितना  अधिक  हो  सके  thoughts produce करने का काम  Mr. विजय  को ही दीजिये . यानि  positive self talk कीजिये . नहीं तो अपने आप ही Mr. पराजय अपना अधिकार जमा लेंगे.

मैंने कई बार is simple but effective technique का use किया  है. मैं अपने thoughts पर हमेशा  नज़र रखता  हूँ और जैसे  ही negative thoughts का production बढ़ने  लगता  है मैं तुरंत  Mr. विजय  को काम  पर लगा  देता  हूँ, यानि  मैं  कुछ  ऐसे  statements खुद  से  बोलता  हूँ जो  positive thoughts की chain बना  देते  हैं  और मैं वापस  track पर आ जाता  हूँ.

For example: जब  मुझे लगता है कि मेरी personal relationships में तनाव आ रहा है तो मैं खुद से कहता हूँ कि भगवान ने  मुझे कितना प्यार करने वाले लोग दिए हैं. और बस आगे का काम मिस्टर विजय कर देते हैं. वो personal relationships से related मेरे सुखद अनुभव को मेरे सामने गिनाने लगते हैं और कुछ ही देर में मेरा mood बिलकुल सही हो जाता है. और जब mood सही हो जाता है तो वो मेरे actions में भी reflect करने लगता है.फिर तो सामने वाला भी ज्यादा देर तक नाराज़ नहीं रह पाता और जल्द ही सारी खटास निकल जाती है और फिर सब अच्छा लगने लगता है.

Thoughts को positive रखने का ये एक बहुत ही practical तरीका है. बस आपको जब भी लगे कि आपके ऊपर negativity हावी हो रही है तो तुरंत उस विचार के विपरीत विचार मन में लाइए. जैसे कि यदि आपके मन में विचार आता है कि आप काबिल नहीं हैं तो तुरन्त इसका उल्टा प्रश्न Mr. विजय से कीजिये कि ,” Mr. Vijay बताइए मैं काबिल क्यों हूँ?” और आप पायेंगे कि आपका ये सेवक आपके सामने उन अनुभवों को रखेगा जिसमे आपने कुछ अच्छा किया हो, for example, आपने कभी कोई prize जीता हो, किसी की मदद की हो, कोई ऐसी कला जिसमे आप औरों से बेहतर हों,etc.

बस इस बात का ध्यान रखियेगा कि आप स्वयं से जो प्रश्न कर रहे हैं वो सकारात्मक हो नकारात्मक नहीं.

आप भी इसे try कर  के देखिये. अपने thoughts पर नज़र रखिये , और जब आपको लगे कि मिस्टर पराजय कुछ ज्यादा ही सक्रीय हो रहे हैं तो जल्दी से कुछ positive self talk कीजिये और मिस्टर विजय को काम पर लगा दीजिये.

Thanks . I hope it works for you. :)



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होना चाहिए आपका लक्ष्य !Goal Setting: S.M.A.R.T


Make Smart Goals

Goal Setting: S.M.A.R.T होना  चाहिए  आपका  लक्ष्य !

दोस्तों यहाँ  मैं  आपके  सामने  कुछ  मिलते  जुलते  goals लिख  रहा  हूँ :



मुझे  अच्छे number लाने  हैं .
मुझे  Maths में  अच्छे  number लाने  हैं .
मुझे  annual exam में  Maths में  अच्छे  number लाने  हैं. 
मुझे  annual exam में  Maths में  कम  से  कम  80 number लाने  हैं. 
मुझे  annual exam में  Maths में 100 number लाने  हैं. 
इन  goals में  से  एक  ही  ऐसा  है  जिसे  SMART कहा  जा  सकता  है . क्या  आप  बता  सकते  हैं  वो  कौन  सा  है ?

सही  उत्तर  जानने  से पहले  आइये  जानते  हैं  की  SMART goal का  मतलब  क्या  होता  है :

SMART  का  मतलब  है :

S –Specific (स्पष्ट)



M -Measurable (जिसे मापा जा सके)

A-Achievable (पूर्ण करने योग्य)

R– Realistic ( वास्तविक)

T– Time-bound ( समय में बंधा हुआ)

एक  SMART goal में  ऊपर  बतायी  गयी  सभी  qualities होनी  चाहियें .

1)      Specific : आपका  लक्ष्य  बिलकुल  clear होना  चाहिए . उसे  सुनने  या  पढने  के  बाद  उसे  लेकर  कोई  संशय  नहीं  होना  चाहिए . अगर  कोई  कहता  है  कि  उसे  “अच्छे  number लाने  हैं ” तो  ये  बात  clear नहीं  होती  कि  वो  किस  subject या  exam की  बात  कर  रहा है  जिसमे  उसे  अच्छे  number लाने  हैं . और  अच्छे  से  क्या  मतलब  है ? किसी  के  लिए  100    में  80 अच्छा  हो  सकता  है  किसी  के  लिए  100   में  60 भी  अच्छा  हो  सकता  है .

इसी  तरह  कई  लोग  कहते  हैं  कि  मेरा  लक्ष्य  है  एक  सफल  आदमी  बनना . पर  जब  आप  उनसे  पूछेंगे  की  किस  क्षेत्र  में  तो  शायद  वो  कोई  satisfactory answer ना  दे  पाएं . यानि  वो  अपने  लक्ष्य  को  लेकर  clear नहीं  हैं , और  जब  goal clear ना  हो  तो  उसके  achieve होने  की  बात  ही  नहीं  उठती .

2)      Measurable : आपका goal ऐसा  होना  चाहिए  जिसे  किसी  पैमाने  पर  मापा  जा  सके . यानि  उस  goal के  साथ  कोई  संख्या  कोई  number जुड़ा  होना  चाहिए . For example, यदि  कोई  कहता  है  की  उसका  लक्ष्य  weight कम  करना  है  तो  सवाल  उठता  है  की  कितना  कम  करना  है . Goal के  साथ  जब  numbers जुड़  जाते  हैं  तो  आप  अपनी  progress को  measure कर  सकते  हैं . और  ये  जान  सकते  हैं  की  आपने  अपना लक्ष्य  सही  तरह से  achieve किया  की  नहीं . इसलिए  एक  अच्छा  goal हमेशा  measurable होता  है .

3)      Achievable: यदि  आप  कोई  ऐसा  goal बनाएँगे  जो  अन्दर  से  आपको  ऐसी  feeling दे  कि  भाई  ये  तो  impossible है  तो  ऐसे  goal का  कोई  अर्थ  नहीं  है . दोस्तों  हमारा  sub-conscious mind conscious mind से   कहीं   अधिक  powerful होता  है ,यदि  आप  conscious mind से  कोई  impossible goal बनायेंगे  और  subconscious उसे  support नहीं  करेगा  तो  आपके  goal पूरा  होने  के  chances नहीं  के  बराबर  होंगे . For example. आप  decide करते  हैं  कि  मुझे  Maths में  100 number लाने  हैं  और  आपका  past record बताता  है  कि  आप  मुश्किल  से  ही  इस  subject में  पास  होते  हैं  तो  तुरंत  ही  आपका  अवचेतन  मस्तिष्क  इसे  नकार  देगा  और  आप  ये  goal achieve नहीं  कर  पाएंगे . वहीँ   अगर  आप  75% marks लाने  की  सोचते  हैं  तो  आपके  सफल  होने  की  संभावना  कहीं  अधिक  होगी .

4)      Realistic: आपका  goal आपके  लिए  realistic होना  चाहिए . Achievable और  Realistic के  बीच  एक  thin line है . जो लक्ष्य  realistic है वो  achievable हो सकता है, पर जो achievable है वो realistic भी हो ऐसा ज़रूरी नहीं है. For एक्साम्प्ले, Exam में  top करना  एक  achievable goal है , पर  यदि  आपने  शुरू  से  पढ़ाई  नहीं  की  है  और  अब  बस  exam में  कुछ ही दिन बचे  हैं  तो  ये  unrealistic होगा  की  आप  top करेंगे .हमेशा  अपनी  capacity के  हिसाब  से  realistic goals बनाएं . ये  भी  ध्यान  रकेहें  की  कोई  काम किसी  और  के  लिए  realistic हो  सकता  है  पर  आपको  उसे  अपने  angle से  देखना  है  और  अपने  goals design करने  हैं .



5)       Time-Bound : Goals के  साथ  अगर  आप  समय  सीमा  नहीं  निर्धारित  करेंगे  तो  आपको  उसे  achieve करने  की  urgency नहीं  महसूस  होगी  और  आप  उसे  पूरा  करने  के  लिए  सही  प्रयत्न  नहीं  कर  पायेंगे . इसीलिए  goal decide करते  वक़्त  ये  निश्चय  करना  कि  इसे  कब  तक  achieve करना  है  बहुत  ही  आवश्यक  है . मैंने  कई  बार  लोगों  को  ये  कहते  सुना  है  कि  मुझे  business start करना  है , पर  ये  बहुत  कम  ही सुनने  में  आता  है  कि  मुझे  इस  साल  के  इस  महीने  से  business start करना  है . अतः  आप  जब  भी  अपना  goal बनाएं  तो  उसे  कब  तक  achieve करना  है  ये  ध्यान में  रखें  और  उसे  अपनी  सोच का  हिस्सा  बनाएं , ऐसा  करने  से  कहीं  ना  कहीं  Law of Attraction भी  आपको  goals achieve  करने  में  help करेगा .

तो  यदि  हम  अपने  शुरआती  प्रश्न  पर  लौटें  तो  हम  पायेंगे  की  अधिकतर  cases में  “मुझे  Annual exam में  Maths में  कम  से  कम  80 number लाने  हैं ”  एक  SMART goal होगा . अगर   “मुझे  Annual exam में  Maths में 100 number लाने  हैं ”  लक्ष्य  की  बात  करें  तो  ये  ज्यादातर   लोगों के  लिए  या  तो  achievable नहीं  होगा  या  realistic नहीं  होगा , पर  कुछ  लोगों  के  लिए  जो  Maths में  exceptionally good हैं  उनके  लिए  ये  एक  SMART goal हो  सकता  है . पर  ऐसी  प्रजाति  बहुत  कम  ही  पायी  जाती  है. :)

SMART goal बना  लेना  मतलब  आधी जंग जीतना है , और  ना  बना  पाना हारना . बाकी  आधी  जीत  के  लिए  आपको  ये  plan करना  होगा  की  आप  कैसे  इस  goal को  achieve करेंगे  …इस  बारे में  फिर  कभी  बात  होगी …Thanks. :)You might like to read this as well : जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है ?

APJ Abdul Kalam Quotes in Hindi

Quote 1: Climbing to the top demands strength, whether it is to the top of Mount Everest or to the top of your career.



In Hindi : शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam 

Quote 2:Do we not realize that self respect comes with self reliance?

In Hindi : क्या हम यह नहीं जानते कि आत्म सम्मान आत्म निर्भरता के साथ आता है ?

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 3: Be more dedicated to making solid achievements than in running after swift but synthetic happiness.



In Hindi : कृत्रिम सुख की बजाये ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहिये.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 4: English is necessary as at present original works of science are in English. I believe that in two decades times original works of science will start coming out in our languages. Then we can move over like the Japanese.

In Hindi : अंग्रेजी आवश्यक है क्योंकि वर्तमान में विज्ञान के मूल काम अंग्रेजी में हैं. मेरा विश्वास है कि अगले दो दशक में विज्ञान के मूल काम हमारी भाषाओँ में आने शुरू हो जायेंगे, तब हम जापानियों की तरह आगे बढ़ सकेंगे.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 5:God, our Creator, has stored within our minds and personalities, great potential strength and ability. Prayer helps us tap and develop these powers.

In Hindi : भगवान, हमारे निर्माता ने हमारे मष्तिष्क और व्यक्तित्व में  असीमित शक्तियां और क्षमताएं दी हैं. इश्वर की प्रार्थना हमें इन शक्तियों को विकसित करने में मदद करती है.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 6: I was willing to accept what I couldn’t change.

In Hindi : मैं हमेशा इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार था कि मैं कुछ चीजें नहीं बदल सकता.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 7: Great dreams of great dreamers are always transcended.

In Hindi : महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 8: If a country is to be corruption free and become a nation of beautiful minds, I strongly feel there are three key societal members who can make a difference. They are the father, the mother and the teacher.

In Hindi : अगर किसी देश को भ्रष्टाचार – मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो , मेरा दृढ़तापूर्वक  मानना  है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं. पिता, माता और गुरु.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 9:If we are not free, no one will respect us.

In Hindi : यदि हम स्वतंत्र नहीं हैं तो कोई भी हमारा आदर नहीं करेगा.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 10: In India we only read about death, sickness, terrorism, crime.

In Hindi : भारत में हम बस मौत, बीमारी , आतंकवाद और अपराध के बारे में पढ़ते हैं.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam 

Quote 11: Let us sacrifice our today so that our children can have a better tomorrow.

In Hindi : आइये हम अपने आज का बलिदान कर दें ताकि हमारे बच्चों का कल बेहतर हो सके.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 12: Look at the sky. We are not alone. The whole universe is friendly to us and conspires only to give the best to those who dream and work.

In Hindi :आकाश की तरफ देखिये. हम अकेले नहीं हैं. सारा ब्रह्माण्ड हमारे लिए अनुकूल है और जो सपने देखते हैं और मेहनत करते हैं उन्हें प्रतिफल देने की साजिश करता है.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 13: Man needs his difficulties because they are necessary to enjoy success.

In Hindi : इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने कि लिए ये ज़रूरी हैं.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 14 : No religion has mandated killing others as a requirement for its sustenance or promotion.

In Hindi : किसी भी धर्म में किसी धर्म को बनाए रखने और बढाने के लिए दूसरों को मारना नहीं बताया गया.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam 

Quote 15: Tell me, why is the media here so negative? Why are we in India so embarrassed to recognise our own strengths, our achievements? We are such a great nation. We have so many amazing success stories but we refuse to acknowledge them. Why?

In Hindi : मुझे बताइए , यहाँ का मीडिया इतना नकारात्मक क्यों है? भारत में हम अपनी अच्छाइयों, अपनी उपलब्धियों को दर्शाने में इतना शर्मिंदा क्यों होते हैं? हम एक माहान राष्ट्र हैं. हमारे पास ढेरों सफलता की गाथाएँ हैं, लेकिन हम उन्हें नहीं स्वीकारते. क्यों?

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 16: To succeed in your mission, you must have single-minded devotion to your goal.

In Hindi :अपने मिशन में कामयाब होने के लिए , आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा.

अब्दुल कलाम  Abdul Kalam

Quote 17: You have to dream before your dreams can come true.

In Hindi :  इससे पहले कि सपने सच हों आपको सपने देखने होंगे .

गुरुवार, 3 मार्च 2016

जैसी होग‍ी सोच, वैसी होगी सेहत

इफ में जैसे-जैसे भौतिक सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे नेगेटिव सोच बढ़ती जा रही है। निगेटिव थिंकिंग का ही आलम है कि हर तरफ निराशा, हिंसा का वातावरण बनता जा रहा है। आइए जानें पॉजिटिव थिंकिंग के फायदे : काउंसलर के अनुसार,सकारात्मक सोच से आदमी के अंदर ऊर्जा आती है। मुश्किल वक्त भी कट जाता है। 

साइकोलॉजिस्ट बताते हैं-पॉजिटिव थिंकिंग से रास्ते की मुश्किलें हल हों या न हों, मन का तनाव जरूर खत्म हो जाता है। जिनकी सोच पॉजिटिव रहती है वे किसी भी महफिल में छा जाते हैं। रिसर्च के अनुसार, सकारात्मक सोचने वालों की उम्र भी अधिक होती है। कुल मिलाकर सकारात्मक सोच 'हैप्पी लांग लाइफ' की कुंजी है। जॉब के लिए भी जब आप जाते हैं तो आपके पॉजिटिव एटीट्यूड को नोट किया जाता है। 

एक बार इन्हें अपनाएं 

फ्रेंड सर्कल : पॉजिटिव थिंकिंग वाले लोगों के साथ रहें। यह बहुत जरूरी है आप के आस-पास के लोग सकारात्मक सोच वाले हों। फिर देखिए कि कैसे मुश्किल हालात भी आसान हो जाते हैं। 

दयालुता - इसकी शुरुआत भी आप अपने आप से करें। खुद के प्रति दयालु रहें आपकी सोच पॉजिटिव हो जाएगी। फिर अपने आसपास के लोगों को जानिए कि किसे आपकी भावनात्मक या सामाजिक जरूरत है? सबको दया की दृष्टि से देखना शुरू कीजिए आपके मन में खुद ब खुद कोमल भाव आने लगेगें। 

विश्वास- जी हां, फरेब की इस दुनिया में विश्वास के साथ चलें। आपका विश्वास आपको दिशा देगा। सबसे ज्यादा जरूरी है स्वयं पर विश्वास। फिर ईश्वर पर विश्वास रखें कि वे आपके साथ कभी कुछ बुरा नहीं करेंगे बल्कि जो आपकी प्रगति के लिए बेहतर होगा वही प्रयोग आपके साथ भगवान करेगा। 

ND
प्रेरणा - जिस व्यक्ति का काम अच्छा लगे उससे प्रेरणा लें। अखबार के अलावा किताबें पढ़ने की आदत डालें। हर किसी में अच्छी बातें तलाशें और जिनसे आप प्रभावित हों व जो समाज हित में हो उसे अपने जीवन में अपनाएं। 

स्माइल- सबसे अधिक जरूरी है एक प्यारी-सी, मीठी-सी स्माइल। आपका मुस्कुराना दूसरों से पहले आपको तनावमुक्त करता है। मुस्कान सोच में बदलाव लाती है। 

रिलैक्स्ड रहें - दिन भर में पचासों ऐसे कारण सामने आते है जिनसे खीज होती है, स्वस्थ रहने के लिए बेहतर है कि यह खीज आपके साथ क्षण भर ही रहे। तुरंत नियंत्रण पाने की कोशिश करें। खुद को परेशानी से तुरंत दूर करना ही सेहत के लिए बेहतर है। 

ध्यान बांटे- जो बात आपको ज्यादा परेशान कर रही है उससे अपना ध्यान हटा कर उन बातों की तरफ रूख कीजिए जो आपको अच्छी लगती है। जैसे ऑफिस में काम के बीच थोड़ी देर के लिए ब्रेक ले लीजिए और गूगल पर खूबसूरत फ्लॉवर्स या क्यूट बेबी सर्च कीजिए। जरूरी नहीं आप भी यही करें आप अपनी रूचि के इमेज तलाश कर सकते हैं। अगर आपको टेडी से प्यार है तो आप उसके आकर्षक फोटो देख लीजिए या फिर लिटिल बर्ड। च्वॉइस आपकी। 

ND
प्यार के बारे में सोचें- हम सभी अपने जीवन में एक बार प्यार अवश्य करते हैं। स्वस्थ रहने के लिए वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है प्यार की मधुर स्मृतियां आपको ताकत देती है। याद रहे, प्यार की अच्छी और सुखद बातें ही सोचें ना कि तकलीफदेह बातें। 

प्यार के सुहाने पल मन में मीठी गुदगुदी का भाव जगाते हैं इसलिए ब्रेकअप के बजाय उससे पहले के लगाव और नए-नए आकर्षण की बातें सोचें आपको उनसे जीवन जीने की नई ऊर्जा मिलेगी। 

सकारात्मक सोच जीवन-संघर्ष में आपकी सच्ची साथी है। साथ ही आपको बीमारियों से भी बचाती 


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अगर आपके पास भी इस तरह की प्रेरक लघु कथाएं हो, तो आप हमें INFOBLACKMAGIC@GMAIL.COM पर भेज सकते हैं। उन्हें आपके नाम और परिचय के साथ प्रकाश‍ित करके हमें अतीव प्रसन्नता होगी।

सकारात्‍मक सोच का जादू सिर चढ़ कर बोलता है

सकारात्‍मक सोच पर बहुत कुछ लिखा गया है। उनमें से कुछ बातें दिल को छू जाती हैं, तो कुछ बस टाइमपास नज़र आती हैं। पर इन पंक्तियों को जब मैंने पढ़ा, तो मंत्र-मुग्‍ध हो गया। ये पंक्तियां मुझे एक मित्र ने वाटसअप पर भेजी थीं। मैं इन्‍हें ज्‍यों का त्‍यों आपके साथ शेयर कर रहा हूं। उम्‍मीद करता हूं कि ये लाइनें आपके दिल को भी छू जाएंगी और आपकी सोच को सकारात्‍मक बनाने में मददगार सिद्ध होंगी। 
सोच का जादू
एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ लिख रहा था- पिछले साल मेरा आपरेशन हुआ और मेरा गाल ब्लेडर निकाल दिया गया। इस आपरेशन के कारण बहुत लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इसी साल मैं 60 वर्ष का हुआ और मेरी पसंदीदा नौकरी चली गयी। जब मैंने उस प्रकाशन संस्था को छोड़ा तब 30 साल हो गए थे मुझे उस कम्पनी में काम करते हुए। इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुःख भी झेलना पड़ा। और इसी साल मेरा बेटा कार एक्सिडेंट हो जाने के कारण मेडिकल की परिक्षा में फेल हो गया, क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट-फुट का नुकसान अलग हुआ। अंत में लेखक ने लिखा, यह बहुत ही बुरा साल था। 

Positive Thinkingजब लेखक की पत्नी लेखन कक्ष में आई तो उसने देखा कि उसका पति बहुत दु:खी लग रहा है और अपने ही विचारों में खोया हुआ है। अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा और पढ़ा कि वो क्या लिख रहा था। वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई और थोड़ी देर बाद एक दुसरे कागज़ के साथ वापस लौटी। उसने वह कागज़ अपने पति के लिखे हुए कागज़ के बगल में रख दिया। लेखक ने पत्नी के रखे कागज़ पर देखा तो उसे कुछ लिखा हुआ नजर आया, उसने पढ़ना शुरू किया- 

पिछले साल आखिर मुझे उस गाल ब्लाडर से छुटकारा मिल गया, जिसके कारण मैं कई सालों से दर्द से परेशान था। इसी साल मैं 60 वर्ष का होकर स्वस्थ दुरस्त अपनी प्रकाशन कम्पनी की नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ। अब मैं पूरा ध्यान लगाकर शान्ति के साथ अपने समय का उपयोग और बढ़िया लिखने के लिए कर पाउँगा। इसी साल मेरे 95 वर्ष के पिता बगैर किसी पर आश्रित हुए और बिना गंभीर बीमार हुए परमात्मा के पास चले गए। इसी साल भगवान् ने एक्सिडेंट में मेरे बेटे की रक्षा की। कार टूट-फुट गई, लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई। उसे नई जिंदगी तो मिली ही और हाँथ पाँव भी सही सलामत हैं। अंत में उसकी पत्नी ने लिखा था, इस साल भगवान की हम पर बहुत कृपा रही, यह साल अच्छा बीता। 

तो देखा आपने, सोचने का नजरिया बदलने पर कितना कुछ बदल जाता है। चीजें वही रहती हैं पर आत्मसंतोष कितना मिलता है। इसलिए जीवन में हमेशा सकारात्मक सोच (Positive Thinking) रखें। आप देखेंगे कि आपके रास्‍ते खुद ब खुद खुल जाएंगे।

Teaching is much more difficult than learning

we have come a long way where our culture comprised of a beautiful relationship between the Guru & the Shishya or student. Students guruwere sent to a Gurukul or school at an early age. They lived with the Guru and considered him as a friend, philosopher and guide. The word Guru translates to ‘Gu’–meaning shadow and the ‘Ru’ meaning one who disperses, an apt word for a person who guides his students or Shishyas to move away from darkness of ignorance towards illumine. Guru expected total surrender from the shishyas, and in return  imparted knowledge and intimacy. They expected only Gratitude for their services which was called as the Guru-dakshina. We have come a long way, now the Guru – Shishya culture has faded.
Our first vice-president, Dr.S.Radhakrishnan was a philosopher, author, statesman, educationist par excellence and he believed that students owe a moral duty towards their teachers. His birthday, the 5th of September each year is regarded as teacher’s day. He believed the best minds in the country should serve as the beacons of light and motivate students to become good citizens of the country. Real teaching is believed to occur when the dr radhakrishnandisciple has disciplined himself and is tuned to the teacher’s wavelength. Today this has become history as our education system has become rusty, rigid, mundane, classroom oriented and Syllabus based. Teachers are mere robots, they deliver lectures without putting their heart and soul in it. Pocket hefty salaries, don’t bother to quench a student’s thirst for knowledge, students too  jeer at them, since it is the age of technology, the virtual guru—— The Google comes to their aid and solves their queries. The virtual guru may help them procure good marks but to become good human beings it is a far cry.
Fortunately I got teachers who illuminated me with good knowledge. Here I want to give an ode especially to my English teacher, Ms. Bugg, a foreign teacher, who settled in India. The knowledge imparted by her, 3 decades back has helped me reach here. I have imbibed all the nuances of English from her. I can say one thing–‘Teachers who love teaching, Teach children teacherto love learning. ‘apt for her. She was an innovator, who taught me English in the seventh standard, where teachers go in classrooms to finish their assigned syllabus and students learn with disinterest, she made English so interesting, that we yearned for more. Her diction and vocabulary was flawless, which inculcated the love for new words within me. During recess when teachers, relaxed with tea, snacks and gossip, she cut out gold, silver and black stars from various papers. The stars signified the type of work done, a gold star pasted in the copy signified excellent work, silver average and black poor work. She took pains to stick those stars in our copy, with personalised comments. Each child was given encouragement. No favourites existed. We all waited for the gong to announce the English period. Each student got personalised attention, so every student clamoured for more. All of us wanted to outdo the other with a notebook adorned with Gold-Stars and her peppy remarks. Her heart and soul went into making us good human beings.
As a token for her good education, I want to gift what a student can gift ———-Gratitude in the form of a verse—-
                                         Teacher and advisor,
                                         Counselor and friend,
                                          Imparter of knowledge
                                          Which never has an end.
                                           All those things you were to me,
                                           And I’m thankful to this day,
                                           I have now succeeded
                                           And you helped to show me the way.

CHANDRAKANTA – (BABU DEVKI NANDAN KHATRI, 1888)

When a language is taught as a subject, generally the course material consists of stories and other literary works of the language. Stories and books written in a language help in understanding the language in a better way.
But once there was such a book, for which people learnt the language. Just to read the book, and to have that experience of reading it. It had acquired such popularity that it added to the language’s and the script’s (Devnagri, in this case) growth.
300x300_46bb88b72f3fde0fb584619d2308aee2The book I am talking about is “Chandrakanta” . Written in Hindi (Devnagri Script) by Babu Devki Nandan Khatri , it was published in 1888, and is considered one of the early works of prose in Hindi Literature. It is also one of the rare works of Fantasy genre in Hindi.
It is a love story of a prince and a princess of 2 kingdoms which are not friendly. (This idea has been done to death in recent years but it was very intriguing and quite new to the public in 1888 ). The kingdoms are Navgarh and Vijaygarh. (Navgarh Vijaygarh me thi Takraar, remember ?) .
The famous character of Kroor Singh keeps on belittling to King of Vijaygarh about Navgarh and its prince, and wants to marry the princess (Chandrakanta) . But because of Prince Virendra Singh and his friend and Aiyyar Tej Singh , Kroor Singh’s plans are foiled.  Kroor Singh runs away to a 3rdkingdom which is ruled by King Shiv Dutt. Kroor Singh somehow makes Shiv Dutt,  a partner to his plan and thus Chandrakanta  is kidnapped by Aiyyars of Shiv Dutt and is kept in a Tilism . Now the Aiyyars of Navgarh and Vijaygarh have to outsmart Aiyyars of Shiv Dutt . Besides, Virendra Singh has to break the Tilism and get Chandrakanta back to her kingdom.
What makes the story interesting is the Characters of Aiyaars. Aiyaars were people in secret service of the kingdom. They had terrific knowledge of medicines, herbs, places, were also skilled fighters, and most importantly could change their faces to act in disguise .They were the best of spies and very loyal to their respective kings. They believed in using their brains instead of swords.
As said earlier both the kingdoms had Aiyaars. These Aiyaars tried to outsmart each other and major portion of the story rests on Aiyaaar’sshoulders.
Devaki_Nandan_Khatri_PortraitAs aforementioned, Chandrakanta is kept in a Tilism. These were buildings and places which were built by skilled people and were used to hide Treasures and could be broken only with help of certain clues and applying loads of brains.  Tilism captured popular imagination and became part of common language.
Any further explanation of the story will lead to spoilers (which will kill the fun), so I will not delve into the story and will leave the rest to the reader.
The book was adopted for a very popular T.V series in 1990s but as usually happens, books and their adaptations become two different stories and works, this also happened with Chandrakanta .
The book was followed by its sequel Chandrakanta Santati , and Bhootnath.
Needless to say the book is still in print and quite famous.
Read it for the Experience of reading. Experience which made people learn reading and writing