गुरुवार, 3 मार्च 2016

जैसी होग‍ी सोच, वैसी होगी सेहत

इफ में जैसे-जैसे भौतिक सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे नेगेटिव सोच बढ़ती जा रही है। निगेटिव थिंकिंग का ही आलम है कि हर तरफ निराशा, हिंसा का वातावरण बनता जा रहा है। आइए जानें पॉजिटिव थिंकिंग के फायदे : काउंसलर के अनुसार,सकारात्मक सोच से आदमी के अंदर ऊर्जा आती है। मुश्किल वक्त भी कट जाता है। 

साइकोलॉजिस्ट बताते हैं-पॉजिटिव थिंकिंग से रास्ते की मुश्किलें हल हों या न हों, मन का तनाव जरूर खत्म हो जाता है। जिनकी सोच पॉजिटिव रहती है वे किसी भी महफिल में छा जाते हैं। रिसर्च के अनुसार, सकारात्मक सोचने वालों की उम्र भी अधिक होती है। कुल मिलाकर सकारात्मक सोच 'हैप्पी लांग लाइफ' की कुंजी है। जॉब के लिए भी जब आप जाते हैं तो आपके पॉजिटिव एटीट्यूड को नोट किया जाता है। 

एक बार इन्हें अपनाएं 

फ्रेंड सर्कल : पॉजिटिव थिंकिंग वाले लोगों के साथ रहें। यह बहुत जरूरी है आप के आस-पास के लोग सकारात्मक सोच वाले हों। फिर देखिए कि कैसे मुश्किल हालात भी आसान हो जाते हैं। 

दयालुता - इसकी शुरुआत भी आप अपने आप से करें। खुद के प्रति दयालु रहें आपकी सोच पॉजिटिव हो जाएगी। फिर अपने आसपास के लोगों को जानिए कि किसे आपकी भावनात्मक या सामाजिक जरूरत है? सबको दया की दृष्टि से देखना शुरू कीजिए आपके मन में खुद ब खुद कोमल भाव आने लगेगें। 

विश्वास- जी हां, फरेब की इस दुनिया में विश्वास के साथ चलें। आपका विश्वास आपको दिशा देगा। सबसे ज्यादा जरूरी है स्वयं पर विश्वास। फिर ईश्वर पर विश्वास रखें कि वे आपके साथ कभी कुछ बुरा नहीं करेंगे बल्कि जो आपकी प्रगति के लिए बेहतर होगा वही प्रयोग आपके साथ भगवान करेगा। 

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प्रेरणा - जिस व्यक्ति का काम अच्छा लगे उससे प्रेरणा लें। अखबार के अलावा किताबें पढ़ने की आदत डालें। हर किसी में अच्छी बातें तलाशें और जिनसे आप प्रभावित हों व जो समाज हित में हो उसे अपने जीवन में अपनाएं। 

स्माइल- सबसे अधिक जरूरी है एक प्यारी-सी, मीठी-सी स्माइल। आपका मुस्कुराना दूसरों से पहले आपको तनावमुक्त करता है। मुस्कान सोच में बदलाव लाती है। 

रिलैक्स्ड रहें - दिन भर में पचासों ऐसे कारण सामने आते है जिनसे खीज होती है, स्वस्थ रहने के लिए बेहतर है कि यह खीज आपके साथ क्षण भर ही रहे। तुरंत नियंत्रण पाने की कोशिश करें। खुद को परेशानी से तुरंत दूर करना ही सेहत के लिए बेहतर है। 

ध्यान बांटे- जो बात आपको ज्यादा परेशान कर रही है उससे अपना ध्यान हटा कर उन बातों की तरफ रूख कीजिए जो आपको अच्छी लगती है। जैसे ऑफिस में काम के बीच थोड़ी देर के लिए ब्रेक ले लीजिए और गूगल पर खूबसूरत फ्लॉवर्स या क्यूट बेबी सर्च कीजिए। जरूरी नहीं आप भी यही करें आप अपनी रूचि के इमेज तलाश कर सकते हैं। अगर आपको टेडी से प्यार है तो आप उसके आकर्षक फोटो देख लीजिए या फिर लिटिल बर्ड। च्वॉइस आपकी। 

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प्यार के बारे में सोचें- हम सभी अपने जीवन में एक बार प्यार अवश्य करते हैं। स्वस्थ रहने के लिए वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है प्यार की मधुर स्मृतियां आपको ताकत देती है। याद रहे, प्यार की अच्छी और सुखद बातें ही सोचें ना कि तकलीफदेह बातें। 

प्यार के सुहाने पल मन में मीठी गुदगुदी का भाव जगाते हैं इसलिए ब्रेकअप के बजाय उससे पहले के लगाव और नए-नए आकर्षण की बातें सोचें आपको उनसे जीवन जीने की नई ऊर्जा मिलेगी। 

सकारात्मक सोच जीवन-संघर्ष में आपकी सच्ची साथी है। साथ ही आपको बीमारियों से भी बचाती 


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अगर आपके पास भी इस तरह की प्रेरक लघु कथाएं हो, तो आप हमें INFOBLACKMAGIC@GMAIL.COM पर भेज सकते हैं। उन्हें आपके नाम और परिचय के साथ प्रकाश‍ित करके हमें अतीव प्रसन्नता होगी।

सकारात्‍मक सोच का जादू सिर चढ़ कर बोलता है

सकारात्‍मक सोच पर बहुत कुछ लिखा गया है। उनमें से कुछ बातें दिल को छू जाती हैं, तो कुछ बस टाइमपास नज़र आती हैं। पर इन पंक्तियों को जब मैंने पढ़ा, तो मंत्र-मुग्‍ध हो गया। ये पंक्तियां मुझे एक मित्र ने वाटसअप पर भेजी थीं। मैं इन्‍हें ज्‍यों का त्‍यों आपके साथ शेयर कर रहा हूं। उम्‍मीद करता हूं कि ये लाइनें आपके दिल को भी छू जाएंगी और आपकी सोच को सकारात्‍मक बनाने में मददगार सिद्ध होंगी। 
सोच का जादू
एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ लिख रहा था- पिछले साल मेरा आपरेशन हुआ और मेरा गाल ब्लेडर निकाल दिया गया। इस आपरेशन के कारण बहुत लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इसी साल मैं 60 वर्ष का हुआ और मेरी पसंदीदा नौकरी चली गयी। जब मैंने उस प्रकाशन संस्था को छोड़ा तब 30 साल हो गए थे मुझे उस कम्पनी में काम करते हुए। इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुःख भी झेलना पड़ा। और इसी साल मेरा बेटा कार एक्सिडेंट हो जाने के कारण मेडिकल की परिक्षा में फेल हो गया, क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट-फुट का नुकसान अलग हुआ। अंत में लेखक ने लिखा, यह बहुत ही बुरा साल था। 

Positive Thinkingजब लेखक की पत्नी लेखन कक्ष में आई तो उसने देखा कि उसका पति बहुत दु:खी लग रहा है और अपने ही विचारों में खोया हुआ है। अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा और पढ़ा कि वो क्या लिख रहा था। वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई और थोड़ी देर बाद एक दुसरे कागज़ के साथ वापस लौटी। उसने वह कागज़ अपने पति के लिखे हुए कागज़ के बगल में रख दिया। लेखक ने पत्नी के रखे कागज़ पर देखा तो उसे कुछ लिखा हुआ नजर आया, उसने पढ़ना शुरू किया- 

पिछले साल आखिर मुझे उस गाल ब्लाडर से छुटकारा मिल गया, जिसके कारण मैं कई सालों से दर्द से परेशान था। इसी साल मैं 60 वर्ष का होकर स्वस्थ दुरस्त अपनी प्रकाशन कम्पनी की नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ। अब मैं पूरा ध्यान लगाकर शान्ति के साथ अपने समय का उपयोग और बढ़िया लिखने के लिए कर पाउँगा। इसी साल मेरे 95 वर्ष के पिता बगैर किसी पर आश्रित हुए और बिना गंभीर बीमार हुए परमात्मा के पास चले गए। इसी साल भगवान् ने एक्सिडेंट में मेरे बेटे की रक्षा की। कार टूट-फुट गई, लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई। उसे नई जिंदगी तो मिली ही और हाँथ पाँव भी सही सलामत हैं। अंत में उसकी पत्नी ने लिखा था, इस साल भगवान की हम पर बहुत कृपा रही, यह साल अच्छा बीता। 

तो देखा आपने, सोचने का नजरिया बदलने पर कितना कुछ बदल जाता है। चीजें वही रहती हैं पर आत्मसंतोष कितना मिलता है। इसलिए जीवन में हमेशा सकारात्मक सोच (Positive Thinking) रखें। आप देखेंगे कि आपके रास्‍ते खुद ब खुद खुल जाएंगे।

Teaching is much more difficult than learning

we have come a long way where our culture comprised of a beautiful relationship between the Guru & the Shishya or student. Students guruwere sent to a Gurukul or school at an early age. They lived with the Guru and considered him as a friend, philosopher and guide. The word Guru translates to ‘Gu’–meaning shadow and the ‘Ru’ meaning one who disperses, an apt word for a person who guides his students or Shishyas to move away from darkness of ignorance towards illumine. Guru expected total surrender from the shishyas, and in return  imparted knowledge and intimacy. They expected only Gratitude for their services which was called as the Guru-dakshina. We have come a long way, now the Guru – Shishya culture has faded.
Our first vice-president, Dr.S.Radhakrishnan was a philosopher, author, statesman, educationist par excellence and he believed that students owe a moral duty towards their teachers. His birthday, the 5th of September each year is regarded as teacher’s day. He believed the best minds in the country should serve as the beacons of light and motivate students to become good citizens of the country. Real teaching is believed to occur when the dr radhakrishnandisciple has disciplined himself and is tuned to the teacher’s wavelength. Today this has become history as our education system has become rusty, rigid, mundane, classroom oriented and Syllabus based. Teachers are mere robots, they deliver lectures without putting their heart and soul in it. Pocket hefty salaries, don’t bother to quench a student’s thirst for knowledge, students too  jeer at them, since it is the age of technology, the virtual guru—— The Google comes to their aid and solves their queries. The virtual guru may help them procure good marks but to become good human beings it is a far cry.
Fortunately I got teachers who illuminated me with good knowledge. Here I want to give an ode especially to my English teacher, Ms. Bugg, a foreign teacher, who settled in India. The knowledge imparted by her, 3 decades back has helped me reach here. I have imbibed all the nuances of English from her. I can say one thing–‘Teachers who love teaching, Teach children teacherto love learning. ‘apt for her. She was an innovator, who taught me English in the seventh standard, where teachers go in classrooms to finish their assigned syllabus and students learn with disinterest, she made English so interesting, that we yearned for more. Her diction and vocabulary was flawless, which inculcated the love for new words within me. During recess when teachers, relaxed with tea, snacks and gossip, she cut out gold, silver and black stars from various papers. The stars signified the type of work done, a gold star pasted in the copy signified excellent work, silver average and black poor work. She took pains to stick those stars in our copy, with personalised comments. Each child was given encouragement. No favourites existed. We all waited for the gong to announce the English period. Each student got personalised attention, so every student clamoured for more. All of us wanted to outdo the other with a notebook adorned with Gold-Stars and her peppy remarks. Her heart and soul went into making us good human beings.
As a token for her good education, I want to gift what a student can gift ———-Gratitude in the form of a verse—-
                                         Teacher and advisor,
                                         Counselor and friend,
                                          Imparter of knowledge
                                          Which never has an end.
                                           All those things you were to me,
                                           And I’m thankful to this day,
                                           I have now succeeded
                                           And you helped to show me the way.

CHANDRAKANTA – (BABU DEVKI NANDAN KHATRI, 1888)

When a language is taught as a subject, generally the course material consists of stories and other literary works of the language. Stories and books written in a language help in understanding the language in a better way.
But once there was such a book, for which people learnt the language. Just to read the book, and to have that experience of reading it. It had acquired such popularity that it added to the language’s and the script’s (Devnagri, in this case) growth.
300x300_46bb88b72f3fde0fb584619d2308aee2The book I am talking about is “Chandrakanta” . Written in Hindi (Devnagri Script) by Babu Devki Nandan Khatri , it was published in 1888, and is considered one of the early works of prose in Hindi Literature. It is also one of the rare works of Fantasy genre in Hindi.
It is a love story of a prince and a princess of 2 kingdoms which are not friendly. (This idea has been done to death in recent years but it was very intriguing and quite new to the public in 1888 ). The kingdoms are Navgarh and Vijaygarh. (Navgarh Vijaygarh me thi Takraar, remember ?) .
The famous character of Kroor Singh keeps on belittling to King of Vijaygarh about Navgarh and its prince, and wants to marry the princess (Chandrakanta) . But because of Prince Virendra Singh and his friend and Aiyyar Tej Singh , Kroor Singh’s plans are foiled.  Kroor Singh runs away to a 3rdkingdom which is ruled by King Shiv Dutt. Kroor Singh somehow makes Shiv Dutt,  a partner to his plan and thus Chandrakanta  is kidnapped by Aiyyars of Shiv Dutt and is kept in a Tilism . Now the Aiyyars of Navgarh and Vijaygarh have to outsmart Aiyyars of Shiv Dutt . Besides, Virendra Singh has to break the Tilism and get Chandrakanta back to her kingdom.
What makes the story interesting is the Characters of Aiyaars. Aiyaars were people in secret service of the kingdom. They had terrific knowledge of medicines, herbs, places, were also skilled fighters, and most importantly could change their faces to act in disguise .They were the best of spies and very loyal to their respective kings. They believed in using their brains instead of swords.
As said earlier both the kingdoms had Aiyaars. These Aiyaars tried to outsmart each other and major portion of the story rests on Aiyaaar’sshoulders.
Devaki_Nandan_Khatri_PortraitAs aforementioned, Chandrakanta is kept in a Tilism. These were buildings and places which were built by skilled people and were used to hide Treasures and could be broken only with help of certain clues and applying loads of brains.  Tilism captured popular imagination and became part of common language.
Any further explanation of the story will lead to spoilers (which will kill the fun), so I will not delve into the story and will leave the rest to the reader.
The book was adopted for a very popular T.V series in 1990s but as usually happens, books and their adaptations become two different stories and works, this also happened with Chandrakanta .
The book was followed by its sequel Chandrakanta Santati , and Bhootnath.
Needless to say the book is still in print and quite famous.
Read it for the Experience of reading. Experience which made people learn reading and writing

Sachi Parathna Ki Shakti

Ek Gaaw Ke Kinare Ek Talaab Tha Jo Ki Bahut Gehra Tha. Jeth Ke Tapti Garmi Ke Mausam Me Bhi Uska Pani Nahi Sukhta Tha, Talaab Me Anek Parkar Ki Rang Birangi Machliya Thi. Waha Ke Log Talaab Ki Machlio Ko Kabhi Nahi Marte The, Machlio Ko Khana Khilane Ke Liye Wahan Ke Log Aaate Ki Goliyaan Banakar Talaab Me Daala Karte The. Talab Ke Kinaare Machliyaan Badi Shanti Se Rehte Thi.

Ek Baar Barsaat Ke Mausam Thoda Sa Bhi Me Pani Nahi Barasa. Talaab Ka Paani Sukhne Laga, Machliyaan Vyaakul Rehne Lagi, Talab Me Itna Kam Paani Reh Gaya Ki Tej Garami Se Neeche Tak Ka Paani Garam Ho Jaata Garm Paani Se Machlio Ko Bada Kasht Hone Laga.

Ek Din Talaab Ke Kinaare Bargad Ke Ped Par Baithe Kabutar Aur Chidiya Bhi Thande Jagah Ki Aur Bhaagne Lage, Machliyaan Kahan Jaati? Or Bhala Kaise Jaati? Do Dino Me Sara Talaab Soona Ho Gaya.

Talaab Me Ek Machli Thi Jo Udh Sakti Thi, Wo Kahin Nahi Gayi, Uske Sathio Ne Kaha Bhi Par Usne Apni Janam Bhoomi Ko Chodkar Jana Pasand Nahi Kiya, Ek Machli Ne Us Se Kaha – "Badhi Behan Tum Kyu Nahi Gayi?"

Badhi Machli Ne Kaha :- Mujhe Apni Janam Bhoomi Bahut Pyaari Hai, Maine Isi Talab Me Janam Liya Hai, Isi Me Pal Kar Badi Hui Hu, Dukh Me Sukh Me Tum Logo Ne Mera Sath Diya Hai. Bhala Tum Logo'n Ko Kaise Chod Sakti Hu, Ye Mujhe Accha Nahi Lagta!"

Badhi Behan Hum Choti Or Na Udhne Wali Machliyaan To Majboor Hai, Hum To Aapki Tarah Aur Kabutar Or Chidiya Ki Tarah Udh Kar Bhi Nahi Jaa Skte. Par Tum To Kahin Jaakar Apne Praan Bachakar Jeewan Paa Sakti Ho.

Badhi Machli Ne Kaha Me Tum Logon Ka Sath Chod Kar Kahi Nahi Jaaungi. Sab Din Barabar Nahi Rehte, Dukh Ke Din Aate Hain Lekin Kuch Din Baad Sukh Ka Naya Sawera Bhi Hota Hai. Hume Bhagwan Par Vishwas Karna Chahiye, Wo Bada Dayalu Hai Sab Par Kripa Karta Hai Dukhi Ki Prathna Me Hamesha Bal Hota Hai.

Shaam Ko Sabhi Machliyaan Ek Jagah Badhi Machli Ke Sath Jama Hui. Sabne Milkar Bahut Der Tak Ishwar Se Prathna Ki, Sabke Mann Me Ye Asha Thi Ki Ishwar Unki Sacchi Prathna Awashya Sunega.

Jis Samay Badhi Machli Aur Choti Machlio Me Baatein Ho Rahi Thi Gaaw Ka Ek Ladka Raamu Ye Sab Sun Raha Tha. Raamu Ne Gaaw Me Jakar, Gaaw Walo Ko Ye Sari Baatein Bataayi – Ki Chote Chote Jeew–Jantuo Ko Bhi Apni Maati Se Kitna Pyar Hota Hai. Aaj Hum Apne Swarth Ke Liye Unki Parwaah Nahi Karte.

Aao Aaj Warsha Ke Liye Hum Bhi Ishwar Se Prathna Karein. Gaaw Walo Ne Sacche Mann Se Prathna Ki Aur Usi Din Aakash Me Kaale Badal Gir Aaye. Joro Ki Warsha Hui Aur Talaab Fir Se Paani Se Bhar Gaya. 

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इन्टरनेट के इस दौर से पहले एक दौर था जब ज़िन्दगी कि वजह से लोग वाकई में बिछड़ जाते थे और उनसे दुबारा मिल पाने कि गुंजाइश काफी कम होती थी, और अगर कभी मुलाक़ात हो भी जाये तो वो किस्मत की बात होती थी

इन्टरनेट के इस दौर से पहले एक दौर था जब ज़िन्दगी कि वजह से लोग वाकई में बिछड़ जाते थे और उनसे दुबारा मिल पाने कि गुंजाइश काफी कम होती थी, और अगर कभी मुलाक़ात हो भी जाये तो वो किस्मत की बात होती थी |
प्रीति-कथा में दो लोग (विनीत और केतकी)  ऐसे ही सालों बाद एक कांफ्रेंस में दिल्ली में मिलते हैं | विनीत दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है और एक प्रसिद्ध लेखक भी (पर कहानी में ज्यादा फर्क इस बात से पड़ता है की  विनीत कभी जमशेदपुर में कॉलेज में पढता था और उच्चशिक्षा के लिए दिल्ली चला गया था |) और केतकी कनाडा में रिसर्च करती है और वहां के नागरिक डॉ.  डेविड पैटरसन के साथ विवाहित है |
खैर, विनीत को जरा अंदेशा है की कांफ्रेंस में केतकी (उसके जमशेदपुर के दिनों कि एक सहपाठी) अपना व्याख्यान देने आने वाली है | (विनीत को ये पता था कि कॉलेज के दिनों में केतकी के मन में उसके प्रति आकर्षण था) |
विनीत दुविधा में है कि वो केतकी से मिले या न मिले पर अपनी दुविधा त्याग कर वो केतकी से मिलता है | और फिर उन दोनों की बातचीत की शुरुवात होती है और इसी के साथ उपन्यास की भी |
औपचारिक बातचीत में विनीत के शादी-शुदा होने का जिक्र आता है और साथ में उसके M.A (दिल्ली विश्वविद्यालय) कि पढाई के दौरान उसके MA के प्रेम-प्रसंग का भी (केतकी के पूछने पर विनीत कहता है कि वह प्रेम बड़ा विचित्र था | केतकी- “क्यों ?” , विनीत- “क्योंकि वह MA का प्रेम था”) |
यह उपन्यास तीन प्रसंग को प्रस्तुत करता है –  विनीत के MA के प्रेम प्रसंग का , केतकी के कॉलेज के समय का विनीत के प्रति आकर्षण और दोनों की यथास्थिति का |
कहानी के कुछ अंश प्रस्तुत हैं –
  • केतकी- “थक गई हूँ, ज़रा हाथ -मूंह धोकर आराम से बैठूंगी तो किस्सा सुनाउंगी अपने विवाह का “| विनीत – “अपने विवाह का या अपने प्रेम का” ? “विवाह का “ | केतकी बहुत स्पष्ट शब्दों में बोली “उस सारे प्रकरण को मैं आज तक प्रेम कि संज्ञा नहीं दे पाई ”| विनीत ने कौतुक भरी दृष्टि उस पर डाली : परदेस में एक अमरीकी ईसाई से स्वेक्षा से विवाह ! और वह भी बिना प्रेम के ?
  • विनीत- “अनास्था और संशय से आज तक किसी का भला नहीं हो रहा …”
  • “प्रत्येक घाव में ज़बान तो होती ही है”
  • “जाने क्या बात थी, मन मांग कुछ नहीं रहा था, देने पर ही तुला हुआ था”|
  • जब उससे मोह था, तो यही मानता था कि उससे प्रेम करता हूँ”| विनीत बोला – “आज भी जब उसकी चर्चा होती है, या उससे आमना – सामना होता है, तो एक पुलक, एक सिहरन सी मेरे तन-मन में दौड़ जाती है | फिर भी यह सत्य है कि मैंने कभी लौटकर वापस उसके पास जाने कि बात नहीं सोची | कभी रोया पछताया भी नहीं | उसके बाद दूसरा प्रेम-प्रसंग चला, वह सफल रहा, शोभा के साथ मेंरा विवाह हुआ | और मैं आज भी मानता हूँ कि मैं मल्लिका के प्रति भी इमानदार था और शोभा के प्रति भी| विनीत ने रूक कर केतकी को देखा, “अब यह तुम्हारे दर्शंशास्त्रिय शोध का काम है कि वह जांच करे कि क्या एक व्यक्ति जीवन में एक से अधिक प्रेम कर सकता है ? यदि वह एक से अधिक बार प्रेम करता है तो क्या वह बेईमानी कर रहा है ? क्या उसके ऐसे प्रेम को प्रेम माना जाएगा, जिसके छूट जाने के बाद उसे टीस तक नहीं होती ?”
        केतकी- “एक समय में एक ही डोंगा ले जाओगे या दोनों एक साथ ले जाओगे ?” केतकी ने मटर-पनीर की सब्जी डोंगे में डालते हुए पूछा |
  • “उसका हृदय धडकता भी होगा तो उसके अपने कानो को भी सुनाई नहीं पड़ता होगा ” |
  • “वैसे स्त्रियों कि यह रुदनशीलता मुझे कभी भी अच्छी नहीं लगी | जब-जब ऐसे अवसर आये , मुझे सदा यही लगा कि यह रोना जैसे मुझ पर एक ऐसा आरोप है, जिसकी कहीं सुनवाई नहीं है ”|
  • “मेरी सुरक्षा में कैसी निश्चिंत बैठी थी वह, और मैं धन्य हुआ सा खड़ा था” |
  • “उस क्षण उसने जिन आँखों से मुझे देखा, उनका वर्णन बहुत ही कठिन है | जैसे वे आँखें कह रही हों, सब कुछ जानते-समझते भी मुझसे ही कहलवाना चाहते हो ? मुझे बाध्य मत करो” |
  • “ इतनी जगहों पर एक साथ मत जियो| विनीत हंस पड़ा “बहुत बिखर जाओगी” | केतकी- “ मैं जानती थी , तुम मेरी भावुकता का मजाक उड़ाओगे” |विनीत-“ मैं भावुकता का मज़ाक उड़ा सकता हूँ, पर भावना का नहीं” |
  • “फिर मैंने उसके विषय में सोचना बंद कर दिया ”| विनीत कि शांति जैसे कुछ और गहरी हो गई, “मैं अपने विषय में सोचने लगा | मेरे लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण था और है कि मैं उससे प्रेम करता था या नहीं ?”
  • विनीत – “यह ना-समझी मेरे जीवन में बहुत काम आई” |
यह उपन्यासन न केवल प्रेम – कहानी सुनाता है, बल्कि प्रेम पर एक प्रेक्षक की हैसियत से एक अलग नजरिया प्रस्तुत करता है और इसलिए मैं इसे हिंदी के चुनिन्दा उपन्यासों में से एक मानता हूँ |
जरुर पढ़ें.

प्रेरणादायक जीवन मंत्र / 5 Jeevan Mantra In Hindi

1) Jeevan Mantra – अपने विचारो को बताने से पहले थोडा सोच ले :
गलत समय पर गलत बाते बोलना आपकी मुसीबतों को बढ़ा सकता है.
अंततः हम सभी को आत्ममंथन की जरुरत होती ही है. ये एक साधारण उपाय है हम हमारे रवैये को बदलकर ही जिंदगी में बहोत सी मुसीबतों का सामना आसानी से कर सकते है. और प्यार भरे रिश्तो को जिंदगीभर के लिये बनाये रख सकते है.
2) Jeevan Mantra – आलोचनाओ से दूर रहे और दूसरो का मजाक न उडाये :
हमारी अनुभूति और उसके प्रकोप के दो तरह के प्रभाव होते है. यदि आप प्यार, स्नेह, दया, करुणा, कल्याण के रूप में सकारात्मक विचारो को भेजते हो तो इससे आपके संबंध और भी मधुर और मजबूत बनेंगे. इसके विपरीत जो लोग गुस्सा, नफरत, चिंता, आलोचना, गलतिया ढूंडना, नकारात्मक सोचना और बुरे शब्दों का प्रयोग करते है, उनके संबंध ख़त्म होते हुए नज़र आते है. और इसी की चिंता में इंसान के जीवन से प्यार और ख़ुशी हमेशा के लिये चली जाती है. दो इंसानों में संबंध में दोनों में एक-दूजे को समझने की ताकत होनी चाहिये, ना की एक-दूजे में अहंकार और द्वेषभाव होना चाहिये.
3) Jeevan Mantra – क्या आप आसानी से दुखी होते हो और मुश्किल से खुश होते हो ?
मेरा ऐसा मानना है की अच्छी और बुरी आदतों को सिमित जगह तक ही रखना आपको गलत रास्तो पर ले जा सकता है. लोगो में बुरी आदतों को जल्दी अपनाने की और उन्हें विकसित करने की आदत होती है जबकि अच्छी आदते बड़ी मुश्किल और लाख कोशिशो के बाद ही लगती है. और इसी वजह से हम एक-दुसरे से नाराज़ रहते है. हमें हमारी आंतरिक भावना को सोच-समझकर ही बाहर लाना चाहिये. आंतरिक भावना के बारे में विचार करते हुए हमें सकारात्मक भावनाओ को बाहर लाना चाहिये और नकारात्मक भावनाओ को नष्ट कर देना चाहिये.
इसके विपरीत ख़ुशी का अहसास, प्यार, आकर्षण, ध्यान रखना, दया और करुणा ये सब हमें अपने स्वभाव में ही दिखाई देता है. हमारा स्वभाव ही हमारे गुणों को दर्शाता है और हमारे स्वभाव पर ही हमारा खुश रहना निर्भर करता है.
रिश्तो में आयी खटास को दूर करने का शबे आसान उपाय अपने स्वभाव को नम्र बनाना और परिस्थिति चाहे आपके अनुकूल हो या विपरीत हमेशा मुस्कुराते रहना ही है. खुश रहने के लिये आपको अपने स्वभाव को बदलने की जरुरत होगी.
4) Jeevan Mantra – अपनी परीभाषा को बदले :
अपनी परीभाषा को इस कदर बनाये की आप आसानी से खुश हो जाये और बड़ी मुश्किल से मायूस हो पाये. निश्चित करे की आपका सबसे अच्छा दिन आज ही है, आज ही आप आसानी से मनचाही जिंदगी जी सकते हो. इन बातो को हमेशा याद रखे तभी आपके जीवन में ख़ुशी, प्यार, आज़ादी हमेशा बनी रहेंगी.
यदि आपसे कोई यह प्रश्न करता है की आप बहोत खुश और उत्साही कैसे रहते हो? तो आपका जवाब, “मै इसलिए खुश हु क्योकि मै आज में जीता हु और आसानी से सांस ले पाटा हु और आसानी से खुश हो जाता हु” होना चाहिये.
आपका ये रवैया आपको एक खुशनुमा जिंदगी जीने में सहायक साबित होगा. और आप हमेशा के प्यार, आकर्षण, सहायक और दया, करुणा के वातावरण में रहने लगोगे, जिससे आपका स्वास्थ और आपकी संपत्ति दोनों ही सुरक्षित होंगे.
आसानी से खुश होने के अलावा एक और बात है जो आपमें होनी चाहिये, और वह है की आसानी से दुखी न होना. किसी भी इंसान के लिये आपको दुखी कर पाना असंभव होना चाहिये. अपने मायूसी की एक सीमा निश्चित कर ले. ठान ले की आप तभी मायूस होंगे जब आपका दिन में 10 लाख डॉलर से भी ज्यादा का नुकसान होगा, यदि इस तरह की कोई घटना आपके जीवन में होती है तो आपको मायूस होना चाहिये. यदि आप इन सीमाओ को अपने जीवन में उपयोग करो तो आप कभी आसानी से मायूस नहीं हो पायेंगे. और आप जिंदगीभर खुश रह पायेंगे.
5) Jeevan Mantra – इन शर्तो को प्रयोग में लाये :
आप जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिये ही सारे बदलाव करते हो. इन आदतों को बढाने के लिये आपको नम्र, इमानदार और लगातार किशिशे करते रहने की जरुरत है. हर समय आपको जीवन की इस नयी परीभाषा का ज्ञान होना चाहिये. इन सभी शर्तो को बहोत सारे पन्नो पर लिखे और उन्हें घर में अलग-अलग जगहों पर लगाये. ताकि बार-बार आपका ध्यान उनकी तरफ जाये. आप इन सभी शर्तो को अपने कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल का वॉलपेपर बनाकर भी रख सकते हो.
ऐसा करने से कुछ ही दीनो में आपकी बुरी आदते अच्छी आदतों में परीवर्तित हो जाएँगी, और आप खुद को इस दुनिया का सबसे खुश इंसान पाओगे. ऐसा करने से आप हमेशा खुश रह सकते हो. और अपने रवैये से दूसरो को कैसे खुश किया जा सकता है यह भी सिख सकते हो.
और इस दुनिया में गुस्सा, नफरत, मायूसी और मुसीबत के लिये कोई जगह नही होंगी.
एक बात हमेशा याद रखे…….
प्यार और ख़ुशी की हर जगह जीत होती है.
जीवन मंत्र पर 10 अनमोल विचार – 10 Quotes On Jeevan Mantra In Hindi :
1) हम शिकायत कर सकते है की गुलाब के पौधे को कांटे होते है या हम आनंदित भी हो सकते है की काटो को गुलाब लगे है. – Abraham Lincoln
2) इस क्रोध दिलाने वाले को आपने कहा जन्म दिया? इसे लाने में मुझे कई साल कोशिशे करनी पड़ी. – Misty Massey
3) मुझे वो लोग पसंद है जो मुसीबतों में भी हसते है… – Leonardo da Vinci
4) हर कोई दुनिया को बदलने की सोच रहा है लेकिन कोई खुद को बदलने के बारे में नहीं सोच रहा. – Leo Tolstoy
5) रवैया एक बहोत छोटी चीज जो आपमें बहोत बड़ा बदलाव ला सकती है. – Winston Churchill
6) हम हमारे भुतकाल को नहीं बदल सकते…हम लोगो के स्वभाव को भी नही बदल सकते. हम निश्चितता को भी नही बदल सकते. यदि हम कुछ कर सकते है तो हम एक रस्सी पर खेल सकते है और वह रस्सी होगी हमारा रवैया. मै इस बात का कायल हु की जिंदगी सिर्फ 10% कुछ करती है बाकी 90% हमारी प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है. इसीलिए हमें सकारात्मक रवैये के साथ चलना चाहिये. – Charles R. Swindoll
7) हमारी सबसे ख़ुशी ख़ुशी का सबसे बड़ा भाग हमारे स्वभाव पर निर्भर करता है, ना की हमारी परिस्थितियों पर. – Martha Washinton
8) यदि आप ये नही सोच सकते की हर दिन एक अच्छा दिन है, तो उन्हें याद करने की कोशिश कीजिये. – Cavett Robert
9) यदि कोई इंसान खुश रहना चाहता है तो वह लम्बे समय तक खुश रह सकता है. – Alexander Solzhenitsyn
10) यदि आप सही में खुश रहना चाहते है तो आपको कोई नही रोक सकता. –A uthor Unknown

Hindi Story of a common man success – एक आम आदमी की सफलता की कहानी

Hindi Story of a common man success
कभी कभी हम life से यूँ ही खुद को निराश पाते है जबकि ऐसे में हमारे अंदर बहुत सारी काबिलियत होती है जिसका हमे अंदाज़ा भी नहीं होता और हम अपनी जिन्दगी बदल सकते है अगर हम अपने बुरे हालातों को positive लें तो जबकि आप कहेंगे कैसे संभव है हर समय positive होना जब हमारे पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा हो लेकिन मैं आपको एक बात clear कर दूँ अगर आप ऐसा सोचते है तो निहायती गलत सोचते है हम चाहे कितनी भी मुश्किलों में क्यों नहीं हो हमारे सामने हमेशा एक दरवाजा हमारे लिए खुला होता है जो Success का ही एक रास्ता है जबकि निराश होकर हम खुद उसे बंद कर लेते है ऐसे में जिन्दगी का दूसरा पहलू हम देख ही नहीं पाते |
आप गौर से देखेंगे तो आप सभी सफल लोगों में एक comman बात देखने को पाएंगे कि जो जितना अधिक सफल आज के समय में उसी ने उतना ही अधिक struggle अपनी बीती जिन्दगी में कर रखा होता है और उसकी यही मुश्किलें उसे आने वाली जिन्दगी की छोटी बड़ी परेशानियों का सामना करने की उसकी काबिलियत को बनाती है | मैं आपको एक कहानी ने माध्यम से ये बताना चाहूँगा |
hindi story of a common-man success
अमरीका के ब्रुकलिन में जन्म लेने वाले टेड विलियम अपने खराब आदतों और कमजोर financial हालत के चलते अमेरिका के ही एक राज्य ऑहियो में सडकों पर भीख माँगा करते थे और नशे की अपनी बुरी आदत के कारण उन्हें दो बार जेल की हवा भी कहानी पड़ी | रिहा होने पर वह सड़क पर एक प्लेकार्ड पर ये लिखकर भीख माँगा करता था कि “मेरी आवाज बहुत अच्छी है |” और रात को पेट्रोल पंप के पीछे बने हुए एक टेंट में सो जाया करता था |

hindi story of a common-man success
hindi story of a common-man success
एक दिन क्या हुआ कि किस्मत से किसी रिपोर्टर की नजर उस पर पड़ी तो उसने उनका interview लेने का सोचा और मजे मज़े में ही एक विडियो शूट करके उसे youtube पर डाल दिया | youtube पर विडियो आते ही वो छा गये | और न्यूयार्क शहर के एक टीवी चैनल में उन्हें अपने morning show के लिए interview लेने के लिए बुलावा भेजा और उन्हें सेलेक्ट भी कर लिया | इसके अलावा उन्होंने कई कम्पनियों के लिए विज्ञापन का काम भी किया है वो थोड़े ही समय के बाद वो एक अमेरिका के जाने माने लोगो में शामिल हो गये |
जिसके बाद उन्होंने अपने संघर्ष और सफलता के ऊपर एक किताब भी लिखी | तो ये है एक कहानी जिस से हम जान सकते है कि जिन्दगी हमे कई मौके देती है बशर्ते हम अपने बुरे हालातों को positivly लें और जिन्दगी से खफा नहीं होते |

कपिल शर्मा के सफलता की प्रेरणादायक कहानी /Kapil Sharma In Hindi

कपिल शर्मा / Kapil Sharma का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ. उनके पिता पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल थे और उनकी माता गृहिणी है. कैंसर की बीमारी के चलते उनके पिता की 2004 को सफ्दुर्जुंग अस्पताल, न्यू दिल्ली में मृत्यु हो गयी थी. कपिल अमृतसर के हिंदु कॉलेज में पढ़ते थे.
कपिल शर्मा ने एमएच वन पर हसदे हसंदे रहो कॉमेडी शो में काम किया इसके बाद इन्हें द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में अपना पहला ब्रेक मिला. ये उन 99 रियलिटी शो में से एक है जिन्हें वे जीत चुके है. 2007 में ये इस शो के विजेता बने जिसने कपिल ने 10 लाख की पुरस्कार राशि जीती.
इसके बाद कपिल शर्मा / Kapil Sharma सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर कॉमेडी सर्कस में भाग लिया. कपिल ने इसके सारे छह सीजन जीते. कपिल डांस रियलिटी शो झलक दिखला जा सीजन 6 भी होस्ट कर चुके है और उन्होंने कॉमेडी शो छोटे मिया भी होस्ट किया है. बाद में शर्मा ने उस्तादों के उस्ताद शो में भी हिस्सा लिया था. 2013 में शर्मा ने अपने प्रोडक्शन बैनर K9 प्रोडक्शन के अंतर्गत अपना शो कॉमेडी नाइट्स विथ कपिल लांच किया जो एक बहोत बड़ा हिट साबित हुआ. कॉमेडी नाइट्स विथ कपिल भारत का सबसे प्रसिद्ध कॉमेडी शो है और उस शो में बड़े-बड़े कलाकार ने हाजिरी दी है जैसे – शाहरुख़ खान, सलमान खान और भी कई बड़ी हस्तिया.
CNN-IBN इंडियन ऑफ़ द इयर अवार्ड में शर्मा को एंटरटेनर ऑफ़ द इयर अवार्ड 2013 से अमोल पालेकर द्वारा सम्मानित किया गया. लोक सभा चुनाव 2014 में उन्हें दिल्ली चुनाव आयोग के द्वारा दिल्ली का ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया.
शर्मा ने 60 वे फिल्मफेयर अवार्ड को कारन जौहर के साथ को-होस्ट के रूप में होस्ट किया. सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग 2014 के चौथे सीजन में वे के प्रेसेंटर थे. ये बैंक चोर नमक यशराज फिल्म्स की फिल्म से अपना बॉलीवुड डेब्यू करने वाले थे लेकिन बाद में उन्होंने ये फिल्म छोड़ दी. 17 अगस्त को उन्हें अमिताभ बच्चन के कौन बनेगा करोडपति के 8वे सीजन के पहले एपिसोड में उन्हें अतिथि के रूप में बुलाया गया था.
कपिल शर्मा एक भारतीय हास्य अभिनेता है. फरवरी 2013 में कपिल शर्मा फ़ोर्ब्स इंडिया पत्रिकाओ में शीर्ष 100 हस्तियो के बिच में चुने गये थे और वह उस सूचि में 93 वे स्थान पर थे. और वहा से सीधे 2014 में वे 33 वे स्थान पर आ गये थे. CNN-IBN ने उन्हें 2013 में मनोरंजन के क्षेत्र में इंडियन और द इयर ख़िताब से नवाजा है. इकोनॉमिक्स टाइम्स ने 2015 में भारत के सबसे प्रसिद्ध और मशहूर हस्तियो की सूचि में भी कपिल शर्मा को शामिल किया हुआ था. भारत के प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान के लिये कपिल शर्मा का नामनिर्देशन भी किया था, जिसे कपिल ने स्वीकार भी किया था. एक साल बाद ही सितम्बर 2015 में स्वच्छ भारत अभियान में उनके योगदान के लिये उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित भी किया. उन्होंने अब्बास मस्तान की रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म किस-किस को प्यार करू से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुवात की थी.
कपिल शर्मा / Kapil Sharma कॉमेडी के क्षेत्र में लगातार वे बिना ब्रेक लिए पिछले 8 सालो से काम कर रहे है. वे एक पशु प्रेमी भी है और वे जीवो के साथ मानवीय व्यवहार का समर्थन भी करते है. उन्होंने एक कुत्ते को भी गोद ले रखा है जिसका नाम जंजीर है…. कपिल शर्मा ने काफी कम वक्त में इतनी सक्सेस पाई है, आज हर युवक उनसे प्रेरित हो रहा है. ये कपिल शर्मा की मेहनत और लगन का नतीजा ही है की बिना किसी बेकग्राउंड और गॉड फादर इस चमचमाती बॉलीवुड के दुनिया में उन्होंने अपने खुद के दम पर जीवन में जो चाह हासिल किया. कहते है ना-
अगर किसी चीज को पूरी दिलो-जान से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने के जुरत में लग जाती है.